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आत्म-अवलोकन से लेकर मोक्ष तक की साक्षी योग निर्देशित ध्यान विधि के बारे में जानें।

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विपश्यना और ज्ञानयोग के साथ साक्षी योग का तुलनात्मक और दार्शनिक महत्व समझें।

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साक्षी योग साधना

प्रथम चरण : विद्यार्थी हेतु आत्म-अवलोकन प्रश्नावली

खंड 1 : आत्म-पहचान (Student Identity Clarity)

प्रश्न 1. एक विद्यार्थी के रूप में आप स्वयं को किस प्रकार देखते हैं?

A. केवल परीक्षा पास करने वाला छात्र
B. करियर-उन्मुख विद्यार्थी
C. व्यक्तित्व-विकास की दिशा में प्रयासरत विद्यार्थी
D. लक्ष्य-सचेत एवं अनुशासित साधक-विद्यार्थी

खंड 2 : लक्ष्य-निर्धारण (Academic & Life Goal)

प्रश्न 2. क्या आपने अपने शैक्षणिक या करियर लक्ष्य को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया है?

A. अभी कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं
B. सामान्य दिशा है, पर निश्चित लक्ष्य नहीं
C. लक्ष्य स्पष्ट है, पर लिखित योजना नहीं
D. लक्ष्य एवं समय-सीमा दोनों स्पष्ट हैं

खंड 3 : योग्यता-मूल्यांकन (Self-Assessment of Ability)

प्रश्न 3. अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अपनी वर्तमान तैयारी को आप किस स्तर पर मानते हैं?

A. अपर्याप्त
B. प्रारंभिक स्तर
C. संतोषजनक
D. लक्ष्य के अनुरूप पर्याप्त

खंड 4 : गुण-विकास (Skill & Virtue Development)

प्रश्न 4. क्या आपको अध्ययन में सफलता हेतु अतिरिक्त गुणों (जैसे एकाग्रता, समय-प्रबंधन, अनुशासन) को विकसित करने की आवश्यकता है?

A. नहीं
B. थोड़ा-बहुत
C. हाँ, स्पष्ट रूप से
D. मैं नियमित रूप से इन गुणों का अभ्यास कर रहा/रही हूँ

खंड 5 : बाधक आदतें (Limiting Habits)

प्रश्न 5. क्या आपकी कोई आदत (जैसे टालमटोल, मोबाइल का अधिक उपयोग, असंगठित दिनचर्या) लक्ष्य में बाधा बन रही है?

A. नहीं
B. निश्चित नहीं
C. हाँ, पहचान ली है
D. पहचानकर सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है

खंड 6 : आत्म-पात्रता (Readiness for Growth)

प्रश्न 6. क्या आप स्वयं को लक्ष्य-साधना के लिए मानसिक रूप से तैयार मानते हैं?

A. अभी नहीं
B. आंशिक रूप से
C. अधिकतर तैयार
D. पूर्णतः प्रतिबद्ध

खंड 7 : समय-प्रबंधन (Time Planning)

प्रश्न 7. क्या आपने अध्ययन के लिए दैनिक/साप्ताहिक समय-सारिणी बनाई है?

A. नहीं
B. अस्थायी योजना
C. लिखित योजना
D. नियमित रूप से पालन की जा रही योजना

खंड 8 : संसाधन-उपलब्धता (Study Resources)

प्रश्न 8. क्या आपके पास आवश्यक अध्ययन संसाधन (पुस्तकें, मार्गदर्शन, नोट्स, अभ्यास सामग्री) उपलब्ध हैं?

A. सीमित
B. आंशिक
C. पर्याप्त
D. पर्याप्त एवं सुव्यवस्थित

खंड 9 : वर्तमान प्रदर्शन (Current Academic Standing)

प्रश्न 9. यदि आज परीक्षा हो, तो आप स्वयं को किस स्तर पर आँकेंगे?

A. सुधार की अत्यधिक आवश्यकता
B. औसत स्तर
C. संतोषजनक
D. उत्कृष्ट

खंड 10 : आत्म-निरीक्षण प्रतिबद्धता (Daily Self-Reflection)

प्रश्न 10. क्या आप प्रतिदिन 10–15 मिनट आत्म-निरीक्षण (आज मैंने क्या सीखा? क्या सुधार किया जाये?) के लिए समर्पित कर सकते हैं?

A. नहीं
B. कभी-कभी
C. नियमित रूप से
D. इसे अपनी दैनिक आदत बनाना चाहता/चाहती हूँ

मूल्यांकन संकेत (विद्यार्थी हेतु)

  • अधिकतर A → दिशा-निर्धारण की आवश्यकता
  • अधिकतर B → प्रारंभिक जागरूकता
  • अधिकतर C → प्रगति की अवस्था
  • अधिकतर D → लक्ष्य-सचेत एवं अनुशासित विद्यार्थी

"ये सिर्फ मूल्यांकन विधि नहीं अपितु एक सुनियोजित, सुसंगठित व सुसंस्कृत (साक्षी योग) मार्ग है, जिससे विद्यार्थी जीवन-प्रबंधन और आत्म-विकास की एक व्यवस्थित प्रणाली के रूप में स्थापित हो सके।"

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भारतीय दार्शनिक परंपरा आदि काल से ही मानवीय दुखों के निवारण और अस्तित्व के यथार्थ की खोज में संलग्न रही है । इस खोज में दो प्रमुख धाराएं स्पष्ट रूप से उभरती हैं: प्रथम, बौद्ध परंपरा की 'विपश्यना' जो प्रत्यक्ष अनुभव और अनित्यता पर बल देती है; और द्वितीय, अद्वैत वेदान्त का 'ज्ञानयोग' जो आत्मा और ब्रह्म की एकता के माध्यम से अज्ञान का नाश करता है ।

तथापि आधुनिक समय में मनुष्य केवल दार्शनिक सिद्धांतों से संतुष्ट नहीं है; वह एक ऐसी पद्धति की तलाश में है जो अनुभव-प्रधान भी हो और जीवन की जटिलताओं के बीच व्यवहारिक भी । इसी दार्शनिक और व्यवहारिक रिक्ति को भरने हेतु 'साक्षी योग' एक समन्वित प्रतिमान के रूप में प्रस्तावित है । विपश्यना की प्रयोगात्मकता और ज्ञानयोग की तात्त्विक गहराई के मध्य साक्षी योग को एक आधुनिक, वैज्ञानिक और जीवनोन्मुख सेतु के रूप में व्याख्यायित करता है ।

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